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आखिर क्यों बांधना पड़ा हनुमान जी भगवान् को बेड़ियों से

सब सुख लहै तुह्मारी सरना ।
तुम रच्छक काहू को डर ना ॥

यह चोपाई हनुमान चालीस की जरूर है लेकिन यह सर्व विधित है कि बजरंग बली के होते हुए किसी को किसी भी परालौकिक सकती से डरने की जरूरत नही है। कहा जाता है कि जो बजरंग बलि का भक्त होता है वह हमेशा प्रसन्न और सकारात्मक सोच का होता है। बजरंग बलि की शक्ति से कोण अनजान है सभी उनकी शक्ति और बुद्धि और चतुराई के आगे हारे है।

बात बहुत पुरानी सुनाई हुई कथा हैं जब श्री जगदीश जी महाराज दक्षिण में विराज मान हुआ करते थे। दक्षिण में समुद्र होने के करना वहाँ बहुत से आंधी और चक्रवात आया करते थे। जिसके चलते भगवान् श्री जगदीश जी महाराज की प्रतिमा बहुत से समय पर समुद्र में बह जाया करती थी। जिससे भगवान् श्री जगदीश के भक्त बहुत परेशान हुआ करते थे और उनकी पूजा में बाधा उत्पन्न हुआ करती थी। इसका कोई भी हल जगदीश जी महाराज को नही दिख रहा था।

तब एक दिन जगदीश जी महाराज परेशां हो कर भगवान् श्री राम चंद्र जी के पास गए और बोले ” प्रभु आप ने समुद्र पर सेतु बना दिया था आप मेरी इस परेशानी का कोई हल दीजिये नही तो आज में आप के द्वार से नही जाऊंगा ” तब श्री राम ने अपने परम भक्त बजरंग बली को बुलाया और बोले ” श्री हनुमान आप इनके साथ इनके मंदिर जाइये और इनकी समस्या का समाधान कीजिये और जब तक समस्या हल नही हो जाती आप तब तक आप वापस नही आना। ” बजरंग बली बोले “ठीक है प्रभु “

बजरंग बली जगदीश जी के साथ उनके मंदिर में चले और समुद्र को ललकार लगाई तब समुद्र देव प्रकट हुए और बोले ” क्या हुआ महाबली हनुमान आप ने हमें किस विषय में याद किया। ” तब बजरंग बली बोले ” आप की समुद्र की लहरे जगदीश जी महाराज को परेशान कर रही है इनको अपने साथ बहा ले जाती है जिससे इनके भक्तो को बहुत परेशानी होती है।” समुद्र देव बोले “प्रभु मैं अपनी लहरो को तो नही रोक सकता लेकिन है अगर कोई इन लहरो को अपने बल वापस भेज दे तो ये इस कुछ नही कर पाएंगी” यह सुन कर बजरंग बली बोले ” ठीक है मैं तुम्हारी लहरो को वापस भेजूंगा। ”

तब बजरंग बली वही रूक गए और लहरो को अपने बल से वापस भेज देते थे। लेकिन उनको महाराज जगदीश जी के चढ़ाये हुए चावल अच्छे नही लगते थे उनसे बजरंग बली का पेट पूरी तरह से नही भारत था। तन उन्होंने एक युक्ति सोची की मैं प्रतिदिन रत के समय में दाल – बाटी- चूरमा खाने के लिए यहाँ से दूसरी जगह चला जाऊंगा और कुछ समय पश्चात् खा कर वापस लोट आऊंगा।

यह कुछ समय तक तो ठीक चला लेकिन एक दिन यह बात समुद्र देव को पता चल गयी। उन्होंने सोचा की लहरो को रात में ही भेज जाये जब यहाँ बजरंग बलि नही रहते है।

एक दिन रात के समय जैसे ही बजरंग बली खाना खाने गए पीछे से समुद्र देव ने अपनी लहरो को भेज और कुछ समय पश्चात् भगवन जगदीश जी समुद्र में बहाने लगे। कुछ समय पश्चात् जब बजरंग बली ने यह सब देखा तो बहुत परेशान हुए।

भगवान् जगदीश जी महाराज वापस शिकायत ले कर श्री राम के पास चले गए और श्री राम ने वापस बजरंग बली को वापस बुलवाया और बोले ” क्या हुआ प्रिय हनुमान आप के होते हुए यह कैसे हुआ ”

तब हनुमान जी बोले ” प्रभु मुझे क्षमा करे। लेकिन इनके यहाँ दाल – चावल के भोग से मेरी भूख शांत नही होती है जिससे में दाल – बाटी – चूरमा खाने के लिए उत्तर में चला जाता हूँ। यह बात समुद्र देव को पता चल गयी और यह सब हो गया।

तब भगवान् जगदीश जी बोले ” आप इतनी बात के लिए परेशान हो रहे थे। आज के बाद आप के दाल – बाटी – चूरमा का ही भोग लगेगा। ”

और श्री राम ने भगवान् जगदीश को सलाह दी कि “आप हनुमान को बाँध के रखियेगा क्योकि हनुमान चंचल है , वह फिर कही और न चले जाये ” तब भगवान् श्री जगदीश ने उनके पैरो को बेड़ियाँ दाल दी
तब से हनुमान को बेड़ियों से बांधा हुआ है।

॥ जय श्री राम ||

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