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महाभारत में कौरवों की माता गांधारी के 100 नही 101 संतान थी

महाभारत का नाम सुनते ही 3 बातें हमें बहुत तेजी से याद आती है पहली भगवान श्री कृष्ण का गीता का ज्ञान , दूसरी कुंती के 5 पुत्र पांडव और तीसरी बात गांधारी के 100 पुत्र कौरव। आज हम आप से गांधारी के 100 पुत्र कोरवो के बारे में बात करेंगे।

बात महाभारत काल की है जब राज्य हस्तिनापुर में महर्षि वेदव्यास आये थे। तब गांधारी ने वेदव्यास की बहुत सेवा की और उनकी इस सेवा से वेद व्यास बहुत प्रसन्न हो गए। तब उन्होंने गांधारी को कोई मन वाँछित वरदान मांगने को कहा तब गांधारी ने उनसे 100 पुत्रो का वरदान माँगा था

कुछ समय पश्चात् गांधारी गर्भवती हुई और महर्षि वेद वेदव्यास के वरदानुसार गांधारी के 100 पुत्र होने थे लेकिन कुछ समय पश्चात् उनके गर्भ से एक मांस का बहुत बड़ा पिंड निकाला जिसे देख गांधारी चिंतित हो गयी उसे चिंतित देख महर्षि वेद व्यास तुरंत प्रकट हुए और बोले ” देवी चिंतित न हो , यह सब आप के वरदान के अनुसार ही हुआ है , आप 100 कुंड लेकर आइये और इस पिंड के 100 टुकड़े कीजिये और इन 100 कुंडो को किसी सुरक्षित स्थान पर रख दीजिये।

तब गांधारी ने वैसा ही किया जैसा की महर्षि वेद व्यास ने बताया था। कुछ समय पश्चात् उनमे से गांधारी ने 100 पुत्र रत्नों को प्राप्त किया। लेकिन उन्ही कुंडो में से एक से गांधारी को पुत्री भी प्राप्त हुई थी। जिससे गांधारी के 100 नही 101 संतान उत्पन्न हुई थी। इस बात का वर्णन महाभारत के साथ – साथ श्री मत भागवत गीता में भी किया गया है।

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